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नवरात्रि में दुर्गा माँ की आराधना कैसे करे? Navratri Durga Puja Mantra

Navratra Durga Puja Mantra
माँ दुर्गा को ऐसे प्रसन्न करे

नवरात्रि आते ही भक्तों का मन उत्साह से भर जाता है और वो माता रानी को प्रसन्न करने के लिए उनकी भक्ति में लीन हो जाते है। अश्विन माष में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होने वाली navratri को शारदीय नवरात्रि कहते है। 

Navratra में पूजा कैसे करे?


इस बार 2021 में शारदीय navratri 7 अक्टूबर से प्रारम्भ हो रही है और समापन 15 अक्टूबर 2021को नवमी वाले दिन होगा। यदि आप भी माता रानी के भक्त है और उनको प्रसन्न करना चाहते है तो यंहा दिए गए विधि अनुसार दुर्गा माँ की आराधना करें। इस बार नवरात्रि 8 दिनों की है और उसके अगले दिन रामनवमी और फिर दशहरा मनाया जाएगा।

घट (कलश) स्थापना के लिए सामग्री


मातारानी के पूंजन के लिए कलश स्थापना का प्रावधान है इसके लिये जो भी सामग्री लगती है उनकी लिस्ट नीचे दी गयी है।

एक चौड़े मुह का मिट्टी का पात्र
मिट्टी या नदी की रेत
तांबे का कलश (घट)
आम के पत्ते
जटा वाला नारियल
मौली एवं लाल चुनरी
बोने के लिए जौ
गंगाजल

नवरात्रि पूंजन सामग्री


नवरात्रि में देवी माँ का पूंजन करने के लिए जरूरी सामग्री में एक लकड़ी की चौकी, माता रानी की मिट्टी की मूर्ति या फ़ोटो, लक्ष्मी गणेश की फ़ोटो, माता की चुनरी और श्रंगार का सामान, प्रसाद के लिए फल, बताशे और अर्पण करने के लिए फूल, देसी घी, दीपक, रुई की बत्ती, धूपबत्ती, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल, कपूर, माता रानी के लिए फूलों का हार और हवन के लिए आम की सूखी लकड़ी या गाय के गोबर के उपले आदि की आवश्यकता आपको होगी।

नवरात्रि पूंजन कैसे करे।


लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाए और गंगा जल छिड़ककर पवित्र करे और उसके बाद मातारानी की प्रतिमा और गणेश लक्ष्मी की तस्वीर चौकी के ऊपर स्थापित करे। कलश पर ॐ या स्वस्तिक का चिन्ह बनाये और कलावा बंधे उसके बाद मिट्टी के पात्र में रेत और जौ मिलाए और उसके ऊपर कलश में गंगाजल, सिक्का, एक जोड़ी लौंग और सुपारी भरकर स्थापित करे। कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाए और नारियल में लाल चुनरी लपेटकर और कलावा बांधकर आम के पत्तो के ऊपर रखे। अब आपका स्थापना का कार्य पूर्ण हो गया है गणपति भगवान की आराधना करते हुए कलश को प्रणाम करे और व्रत का संकल्प ले। माता रानी के सामने दीपक जलाएं और माता रानी का तिलक करें चुनरी चढ़ाए या पहनाए, श्रृंगार का समान माता रानी के चरणों में रखे, फूलों की माला पहनाए और पान, सुपारी, फूल, फल और नैवेद्य प्रसाद अर्पित करके माता रानी की पूजा आराधना करें।

नवरात्रि पूंजन मंत्र।


माता रानी के पूंजन और उनको प्रसन्न करने के लिए यंहा बताये गए मंत्रो का भाव के साथ उच्चारण करे।

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 
 
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
 
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
 
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
 
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
 
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
 
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
 
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै'

Navratri में सभी दिन माता के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।


1. नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। जब राजा दक्ष ने भगवान शंकर को यज्ञ में निमंत्रित नही किया था और उनका अपमान किया था तो माता सती ने क्रोधित होकर अपने आप को भष्म कर लिया था और उनका दूसरा जन्म माता शैलपुत्री के रूप में पिता राजा "हिमांचल" और माता मैनामती के यंहा हुआ था। देवी शैलपुत्री की आराधना के लिए साधक को अपने मन को "मूलाधार चक्र" में स्थापित करना चाहिए और पीले रंग के वस्त्र पहनकर माता की पूजा करनी चाहिए।

माता शैलपुत्री का मंत्र :- 

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥[1]वंदे वाद्द्रिछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः||


2. Navratri का दूसरा दिन माता ब्रम्हचारिणी का होता है और भक्त उनकी पूजा करते है इनके एक हांथ में कमंडल और दूसरे हांथ में माला होती है। इस दिन योगी माता की आराधना करके अपनी कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करते है। कहते है माता ब्रम्हचारिणी की आराधना हरे रंग के कपडे पहन कर करे तो अधिक शुभ होता है।

माता ब्रम्हचारिणी का मंत्र :-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

3.  नवरात्रि के तीसरे दिन माता चन्द्रघण्टा की आराधना की जाती है माँ का ये स्वरूप कल्याण देने वाला है माता शेर पर सवार है, रंग सोने के समान और अस्त्र - शस्त्र से सुशोभित देवी के10 हांथ है। माँ चंद्रघंटा की पूजा करते समय " ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः" का उचारण करे भूरे रंग के कपड़े पहनकर आराधना करें तो अधिक अच्छा है।

माँ चंद्रघंटा मंत्र :-

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

4. नवरात्रि का चौथा दिन माँ कुष्मांडा का होता है इन्हें अष्ठ भुजा देवी भी कहा जाता है क्योंकि इनके 8 हांथ है जिनमे अक्षमाला, कमण्डल, कलश, सुदर्शन चक्र, गदा, धनुष बाण एवं कमल सुशोभित है और बाघ पर सवार है कहते है माता कुष्मांडा ही वह आदिसक्ति है जिन्होंने ब्रम्हांड की रचना की है। 

माता कुष्मांडा का मंत्र -

सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।

5. नवरात्रि के पांचवे दिन देवी स्कन्दमाता की पूजा और आराधना करके भक्तजन माँ को प्रशन्न करते है। यह देवी माता पार्वती का पांचवा रूप मानी जाती है। भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कन्द भी है और उनकी माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहा जाता है। देवी माँ सिंह पर सवार है दोनों हांथो में कमल दल है और गोद मे भगवान कार्तिकेय को लिए हुए है इन्हें विद्या वाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है। माता की आराधना करने के लिए इस आसन मंत्र  "ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः" का जाप करे

देवी स्कन्दमाता का मंत्र :-

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया. शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी

6. नवरात्रि के छठे दिन देवी माँ कात्यायनी का पूजन किया जाता है इनके बारे में कहा जाता है कि महर्षि कात्यायन ने घोर तपस्या करके दुर्गा माता को प्रसन्न किया और उनसे अपने यंहा पुत्री के रूप में जन्म लेने का वर मांगा कात्यायन की पुत्री होने के कारण माँ कात्यायनी नाम से विख्यात हुई।

माँ कात्यायनी का मंत्र :-

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

7.  सातवें दिन भक्तजनों को माता कालरात्रि की आराधना करनी चाहिए यह माता पार्वती का सातवां स्वरूप है इन्हें काली, भद्रकाली, भैरवी, चामुंडा और चंडी आदि नामो से भी जाना जाता है। माता का यह स्वरूप सत्रुओं का संहार करने वाला है कहते है चामुंडा माता जब क्रोधित हो जाती है तो उनका शरीर काला पड़ जाता है और वह काली का रूप धारण कर लेती है। 

देवी कालरात्रि मंत्र : -

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता
लंंबोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।

वामपादोल्लसल्लोहलताकंठकभूषणा

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

8. Navratri का आठवां दिन देवी महागौरी का होता है और उनकी पूजा - आराधना की जाती है। माता का यह स्वरूप सुख शांति देने वाला और धन धान्य से भरने वाला है इन्हें अन्नपूर्णा भी कहा जाता है। अपने वाहन बैल पर सवार देवी महागौरी माँ अपने एक हाँथ में त्रिशूल और दूसरे हाँथ में डमरू धारण किये हुए है माता को संगीत बहुत प्रिय है। आठवें दिन कन्या पूजन का विधान है इस दिन भक्तजनो को कम से कम 9 कन्याओ का पूजन करके उन्हें भोजन कराना चाहिए इससे माता रानी प्रसन्न होती है और मनवांक्षित फल प्रदान करती है।

देवी महागौरी मंत्र : -

वृषे समारूढा, श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यात्, महादेवप्रमोद दाद।।

9. नवरात्र में नवमी के दिन माता सिद्धिदात्री का पूंजन किया जाता है यह देवी सभी कार्य सिद्ध करने वाली और मोक्ष प्रदायनी है। इस दिन यदि साधक माता को प्रशन्न कर ले तो उसके अंदर ब्रम्हांड विजय करने का सामर्थ्य आ जाता है उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते है। देवीपुराण के अनुसार भगवान शंकर ने इन्ही देवी की कृपा से आठो सिद्धियों अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व को प्रप्त किया था। देवी माँ के स्वरूप के बारे में बात करे तो माता सिद्धिदात्री का वाहन सिंह और इनका आसन कमल है इनके चार हाँथ है।

देवी माँ सिद्धिदात्री मंत्र :-

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि | सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||

नौ दिन की पूजा के बाद दसवे दिन विजयादशमी होती है इसी दिन दशहरा मनाया जाता है कहते है इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। वध करने से पहले भगवान राम ने दुर्गा माता का पूजन किया था और उनसे विजय का आशीर्वाद मंगा था।

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